Best explanation of Respiration-श्वसन

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Respiration-श्वसन 

Breathing:- जीवधारीयों द्वारा ऑक्सीजन प्राप्त करने व कार्बन डाइऑक्साइड को मुक्त करने की प्रक्रिया को श्वास लेना कहते है

 Respiration:-श्वसन एक जटिल प्रक्रिया हैं। जिसके अंतर्गत ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड गैसों का विनिमय, व ऊर्जा मुक्त क रने के लिए पाचित खाद्य का ऑक्सीकरण होता है।  

 

श्वसन के चरण

  • बाह्य श्वसन(External respiration)
  • गैसों का परिवहन(Transport of gases)
  • आंतरिक या कोशकीय श्वसन (Internal and cellular respiration)

बाह्य श्वसन(External respiration):-  प्राणी और वातावरण के बीच श्वसन गैसों (O2 एवं CO2) के आदान-प्रदान अर्थात् ऑक्सीजन का शरीर में आना और कार्बन डाइऑक्साइड का शरीर से बाहर जाना बाह्य श्वसन कहलाता है चूंकि इस प्रकार की श्वसन क्रिया फुफ्फुसों (Lungs) में ही सम्पन्न होती है।

श्वास लेने वाली क्रिया को उच्छ्वास (Inspiration) और निकालने की क्रिया को निश्वसन (Expiration) कहते हैं। मनुष्य एक मिनट में 15 से 17 बार सांस लेता है।

मनुष्य में श्वसनांग

  • श्वसन तंत्र के अंतर्गत वे सभी अंग आते हैं जिससे होकर वायु का आदान-प्रदान होता है जैसे- नासिका, ग्रसनी, लैरिंग्स, ट्रेकिया, ब्रोंकाई एवं बैक्रियोल्स और फेफड़े।
  • नासिका:नासिका-छिद्रों में वायु (O2) प्रवेश करती है। नासिका छिद्रों के भीतर रोम या बाल होते हैं, जो धूल के कण तथा सूक्ष्मजीवों को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है।
  • नासिका:छिद्रों की गुहा म्यूकस कला (Mucus membrane) से स्तरित होती है, जो म्यूकस स्रावित कर वायु को नम बनाती है।
  • ग्रसनी (Pharynx):वायु नासिका-छिद्रों से ग्रसनी में आती है। इसकी पाश्र्व भित्ति में मध्यकर्ण की यूस्टेकियन नलिका (Eustachian tube) भी खुलती है।
  • लैरिंग्स (Larynx):इसे स्वर-यंत्र भी कहते हैं। इसका मुख्य कार्य ध्वनि उत्पादन करना है। श्वासनली का ऊपरी सिरा एक छोटे छिद्र के द्वारा ग्रसनी से जुड़ा होता है जिसे ग्लाटिस कहते हैं, ग्लाटिस एक कपाट द्वारा बंद होता है। इसे इपिग्लाटिस (Epiglottis) कहते हैं। यह ग्लाटिस द्वार को बंद करके भोजन को श्वासनली में जाने से रोकती है।
  • ट्रैकिया (Trachea):यह वक्ष गुहा में होती है। यहाँ यह दो शाखाओं में बँट जाती है-इसमें से एक दायें फेफड़े में तथा एक बायें फेफड़े में जाकर फिर शाखाओं में विभक्त हो जाती है।
  • ब्रोंकाई:ट्रैकिया, वक्षीय गुहा में जाकर दो भागों में बँट जाती हैं, जिसे ब्रोंकाई कहते हैं।
  • फेफड़े (Lung):यह वक्ष गुहा में एक जोड़ी अंग है जिसका आधार डायाफ्राम पर टिका रहता है। प्रत्येक फेफड़े में करोड़ों कुपिकाए (Alveoli) होते हैं।
  • प्रत्येक फेफड़ा एक झिल्ली द्वारा घिरा रहता है जिसेप्लूरल मेम्ब्रेन (Pleural membrane) कहते’ हैं, जिसमें द्रव भरा होता है जो फेफड़ों की रक्षा करती है।

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गैसों का परिवहन(Transport of gases)

गैसों का विनिमय फेफड़े के अन्दर होता है। श्वासोच्छवास(Respiration) के फलस्वरूप वायु फेफड़े के विभिन्न वायुकोष्ठकों (Alveoli) में पहुँच जाती है। वायुकोष्ठकों के चारों और रक्त कोशिकाओं का घना जाल उपस्थित रहता है। इस समय की वायु ऑक्सीजन महीन शिरा कोशिकाओं (Venous capillaries) की दीवार से होकर इनके रुधिर में पहुँच जाती है। बदले में रुधिर से CO2 केशिकाओं निकाली गई वायु की दीवार से बाहर निकलकर बाहर जाने वाली वायु में मिल जाती है। यह गैसीय विनिमय घुली अवस्था में या विसरण प्रवणता (Diffusion gradient) के आधार पर साधारण विसरण द्वारा होता है।

Exchange of gases

ऑक्सीजन का परिवहन (Transportation of oxygen): ऑक्सीजन का परिवहन मुख्यतः रुधिर में पाये जाने वाले लाल वर्णक हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) के द्वारा होता है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन से संयुक्त होकर एक अस्थायी यौगिक ऑक्सीहीमोग्लोबिन (Oxy haemoglobin) बनाता है जो एक भौतिक परिवर्तन (Physical change) है। यह ऑक्सीहीमोग्लोबिन रुधिर परिसंचरण के द्वारा शरीर की विभिन्न कोशिकाओं में पहुँचता है।

कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन (Transportation of Carbon dioxide): कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कोशिकाओं से फेफड़े तक हीमोग्लोबिन के द्वारा केवल 10 से 20 प्रतिशत तक ही हो पाता है।

प्लाज्मा में घुलकर (Dissolved in plasma): कार्बन डाइऑक्साइड रुधिर प्लाज्मा में घुलकर कार्बोनिक अम्ल (Carbonic acid) बनाती है। कार्बोनिक अम्ल के रूप में CO2 का लगभग 7% परिवहन होता है।

CO2 + H2O ⇌ H2CO3 (कार्बोनिक अम्ल)

बाइकार्बोनेट्स के रूप में (As bicarbonates): बाइकार्बोनेट्स के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड के अधिकांश भाग (लगभग 70%) का परिवहन होता है। यह रुधिर के पोटैशियम तथा प्लाज्मा के सोडियम से मिलकर क्रमशः पोटैशियम बाइकार्बोनेट एवं सोडियम बाइकार्बोनेट बनाता है।

कर्बोमिनो यौगिकों के रूप में (As carbomino compounds): कार्बन डाइऑक्साइड हीमोग्लोबिन के अमीनो (-NH2) समूह से संयोग कर कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन (Carboxy haemoglobin) तथा प्लाज्मा प्रोटीन से संयोग कर कार्बोमिनो-हीमोग्लोबिन बनाता है। इस प्रकार यह लगभग 23% CO2 का परिवहन करता है।

 

आंतरिक या कोशकीय श्वसन (Internal and cellular respiration)

सजीव कोशिकाओं में भोजन के आक्सीकरण के फलस्वरूप ऊर्जा उत्पन्न होने की क्रिया को कोशिकीय श्वसन कहते हैं।

इस क्रिया के दौरान मुक्त होने वाली ऊर्जा को ATP नामक जैव अणु में संग्रहित करके रख लिया जाता है जिसका उपयोग सजीव अपनी विभिन्न जैविक क्रियाओं में करते हैं।

C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O 

 ऊर्जाà2880 किलो जूल (प्रति ग्लूकोज अणु)

Complete nervous System-तन्त्रिका तन्त्र

आन्तरिक श्वसन दो प्रकार के होते हैं-

ऑक्सी श्वसन (Aerobic respiration):- In the presence of oxygen

अनॉक्सीश्वसन (Anaerobic respiration):- In the absence of oxygen

 

ऑक्सी श्वसन के मुख्य 3 चरण हैं

    1.ग्लाइकोलिसिस  2.क्रेब्स चक्र   3.ETC

ग्लाइकोलिसिस (Glycolysis)

 

ग्लाइकोलिसिस श्वसन की प्रथम अवस्था है जो कोशिका द्रव में होती है। इस क्रिया में ग्लूकोज 1 अणु ग्लूकोज से पाइरूविक अम्ल के 2 अणु बनते हैं तथा कुछ ऊर्जा मुक्त होती है। यह क्रिया कोशिका द्रव्य में होती है।

ग्लाइकोसिस के विभिन्न चरणों का पता एम्बडेन, मेयरहॉफ एवं पर्नास नामक तीन वैज्ञानिकों ने लगाया। इसलिए श्वसन की इस अवस्था को इन तीनों वैज्ञानिकों के नाम के आधार पर AMP पाथवे भी कहते हैं।

   ग्लूकोज + 2 NAD+ + 2 Pi + 2 ADP → 2 पाइरूवेट + 2 NADH + 2 ATP +2H+ + 2 H2O

 

क्रेब्स चक्र(Krebs Cycle)

Krebs cycle

इस चक्र का अध्ययन सर्वप्रथम हैन्स एडोल्फ क्रेब ने किया था, उन्हीं के नाम पर इस क्रिया को क्रेब्स चक्र कहते हैं।

क्रेब्स चक्र को सिट्रिक एसिड चक्र  या TCA चक्र (tricarboxylic एसिड चक्र) के रूप में भी जाना जाता है ।

ग्लाइकोलिसिस को क्रेब्स चक्र से जोड़ने का काम linked रिएक्शन करती है जिसमे pyruvic अम्ल  acetyle CoA में बदलता है इस क्रिया में 2 NADH के अणु मिलते है

(i) क्रेब्स चक्र में प्रवेश करने से पूर्व पाइरुविक अम्ल से CO2 के एक अणु तथा दो हाइड्रोजन परमाणुओं का विमोचन होता है। बचा हुआ अणु कोएन्जाइम-A से संयुक्त होकर ऐसीटल कोएन्जाइम-A बनाता है।

(ii) ऐसीटल कोएन्जाइम-A अब कोशिका में उपस्थित ऑक्जैलो एसीटिक अम्ल तथा जल से क्रिया कर साइट्रिक अम्ल बनाता है।

(iii) साइट्रिक अम्ल का क्रेब्स चक्र में धीरे-धीरे कई अभिक्रियाओं के माध्यम से क्रमबद्ध विघटन होता है। इन अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप कई मध्यवर्ती अम्ल बनते हैं, जैसे- ऑक्जैलोसक्सिनिक अम्ल, अल्फा कीटोग्लूटेरिक अम्ल, सक्सिनिक अम्ल, फ्यूमेरिक अम्ल मैलिक अम्ल आदि। इन परिवर्तनों के दौरान CO2 के 2 अणु तथा हाइड्रोजन के 8 परमाणु मुक्त होते हैं।

(iv) अन्त में मैलिक अम्ल का परिवर्तन ऑक्जैलोग्लिसरिक अम्ल में होता है। यह पुनः दूसरे पाइरुविक अम्ल के साथ संयुक्त होकर क्रेब्स चक्र में पुनः प्रवेश करता है।

इस पुरे चक्र में 6 NADH अणु मिलते है।

Electron Transport Chain

यह ऑक्सी श्वसन की अंतिम अवस्था है और माइटोकॉन्ड्रिया के क्रिस्टी वाले हिस्से में संपन्न होते हैं।

इस क्रिया में NADH और FADH2 के अणुओं का  ऑक्सीकरण होता है।इस क्रिया में ATP के रूप में सबसे अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है । माइटोकॉण्ड्रिया की क्रिस्टी पर पाए जाने वाले संकुल में उपस्थित अवयव सामान्यत: इलेक्ट्रॉन ग्राही के नाम से जाने जाते है।
इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र के अंतर्गत इलेक्ट्रानो का स्थानान्तरण निम्न चरणों में संपन्न होता है तथा इन चरणों में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉन NADH2 तथा FADH2 से ऑक्सीकरण की क्रिया के फलस्वरूप उत्सर्जित होते है।

ETC

कोशिकाओ में संपन्न होने वाली श्वसन की क्रिया के फलस्वरूप कुल 36 या 38 ATP का उत्सर्जन होता है , जिनका विभाजन निम्न प्रकार से है –
I → ग्लाइकोलाइसिस → 2ATP
II → पुरुविक अम्ल का एसिटिल CO-A में परिवर्तन → 2 ATP
III → Kreb चक्र → 2 ATP
ETC → केवल ऊर्जा का उत्सर्जन 30 ATP या 32 ATP

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अनॉक्सीश्वसन (Anaerobic respiration)

वह श्वसन जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है, अनॉक्सी श्वसन कहलाता है। इसमें जटिल रासायनिक प्रतिक्रियाओं की श्रृंखला द्वारा ग्लूकोज (कोशिकीय ईंधन) का आंशिक विखंडन होता है। ग्लूकोज का यह आंशिक विखंडन 12 एन्जाइमों की सहायता से कोशिकाद्रव्य में सम्पन्न होती है।

इसके अन्तर्गत होनेवाले सम्पूर्ण प्रक्रम को ग्लाइकोलिसिस (Glycolysis) कहते हैं। अनॉक्सी श्वसन का अन्तिम उत्पाद पाइरुविक अम्ल (Pyruvic acid) होता है। सम्पूर्ण प्रक्रम में 4 अणु ATP ऊर्जा का निर्माण होता है, जिसमें से 2 अणु ATP ऊर्जा इस प्रक्रम के सम्पन्न होने में खर्च हो जाती है। इस प्रकार 2 अणु ATP का शुद्ध लाभ होता है। इसमें ग्लूकोज अणु के आंशिक विखण्डन के कारण उनसे लगभग 7% ऊर्जा मुक्त हो पाती है, शेष ऊर्जा पाइरुविक अम्ल के बन्धनों में ही संचित रह जाती है। यह बची हुई ऊर्जा आण्विक ऑक्सीजन की उपस्थिति में पाइरुविक अम्ल के पूर्ण विखण्डन के फलस्वरूप मुक्त होती है।

यदि पाइरुविक अम्ल को स्थायी रूप से आण्विक ऑक्सीजन बिल्कुल उपलब्ध नहीं हो पाती तब यह चरण स्थायी हो जाता है और पाइरुविक अम्ल लैक्टिक अम्ल या एथिल ऐल्कोहॉल में परिवर्तित हो जाता है। उदाहरणस्वरूप- पौधों, मांसल फलों, जीवाणुओं एवं फफूंदों में पाइरुविक अम्ल का परिवर्तन एथिल ऐल्कोहॉल में हो जाता है और CO2 मुक्त होती है।

C6H12O6 (ग्लूकोज) → 2C2H5OH (एथिल ऐल्कोहॉल) + 2CO2 + 210 kJ

जन्तुओं में पेशियों में आण्विक ऑक्सीजन की स्थिति में पाइरुविक अम्ल का परिवर्तन लैक्टिक अम्ल में हो जाता है ।

C6H12O6 (ग्लूकोज) → 2C3H6O3 (लैक्टिक अम्ल) + 150 kJ

अनॉक्सी श्वसन प्रायः जीवों में गहराई पर स्थित ऊतकों में, अंकुरित होते बीजों में व फलों में अल्प समय के लिए होता है। अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic respiration) को शर्करा किण्वन भी कहा जाता है।

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