नागा साधु(सम्पूर्ण जानकारी)-Amazing Facts about Naga Sadhus

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नागा साधु या नागा बाबा

आपने बहुत सारे साधु-संतों के बारे में सुना होगा। लेकिन इन सब में से नागा साधु सबसे अलग होते हैं। इन्हें नागा बाबा भी कहा जाता है।  इन्हें नागा साधु इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह प्राय नग्न रहते हैं। नागा साधु अखाड़ा में रहते हैं और युद्ध कला में माहिर होते हैं। नागा साधु हिन्दू धर्मावलम्बी साधु हैं ।

नागा साधुओं का इतिहास

भारतीय सनातन धर्म में  आदि गुरु शंकराचार्य का बहुत बड़ा योगदान है। जब आदि गुरु शंकराचार्य का जन्म हुआ उस समय भारत में धर्म व्यवस्था काफी अच्छी नहीं थी।  उस समय भारत पर कई विदेशी आक्रमण हुआ करते थे।  विदेशी आक्रमणकारी भारत से धन संपदा  लूट कर ले जाया करते थे।  इन आक्रमणों के कारण  लोगों में अराजकता थी और शांति भंग हो गई थी।
इसलिए शंकराचार्य ने सनातन धर्म की  स्थापना के लिए भारत के चारों कोनो में चार मठों की स्थापना की।  इसके साथ-साथ शंकराचार्य जी ने मठों की संपत्ति लूटने वालों  से बचने के लिए  इन मठों में अखाड़ों की स्थापना की। इन अखाड़ों में साधुओं को  शारीरिक व्यायाम के साथ-साथ हथियार चलाने की शिक्षा भी दी जाती थी।
वर्तमान में अखाड़ा उस जगह को कहते हैं जहां पहलवान कसरत और कुश्ती का अभ्यास करते हैं।

नागा साधुओं का नामकरण

जल्द ही इस अखाड़े में रहने वाले साधू और  अन्य लोगों ने आक्रमणकारियों से लोगों की रक्षा करनी शुरू कर दी। इन अखाड़ों में रहने वाले साधुओं को ही नागा साधु कहा जाने लगा। नागा साधुओं को लेकर कुंभ मेले में बड़ी जिज्ञासा और कौतुहल रहता है, खासकर विदेशी पर्यटकों में।

नागा साधु
इतिहास में कई ऐसे युद्ध है जिसमें नागा साधुओं ने विदेशी आक्रमणकारियों से मुकाबला किया है। जब अहमद शाह अब्दाली ने गोकुल पर आक्रमण किया था तो उस समय नागा साधुओं ने ही को  गोकुल की रक्षा की थी।

नागा साधुओं जीवन शैली

♦वर्तमान में नागा साधुओं के आश्रम भारत में कई  जगहों पर है. नागा बाबा प्राय भीड़ से दूर रहते हैं और कठोर अनुशासन से अपना जीवन बिताते हैं।

♦नागा बाबा अपने गुस्से के लिए प्रचलित हैं।  ये साधु शिव जी के भक्त माने जाते हैं और साथ-साथ अग्नि की भी पूजा करते हैं।

♦इनके पांच गुरु  होते हैं जो हैं शिव, विष्णु ,शक्ति ,सूर्य और गणेश।

♦ये कपड़े नहीं पहनते हैं यह अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं।  यदि यह साधु वस्त्र धारण करना चाहते हैं तो यह केवल गेरूए रंग के वस्त्र ही पहन सकते हैं।  अन्य किसी रंग के वस्त्र धारण करने की अनुमति नहीं होती।

♦हाथ में चिमटा और लंबे बाल इनकी पहचान है।  फूलों के साथ-साथ महिलाएं भी नागा साधु बन सकती हैं।  लेकिन महिलाओं को अपने शरीर पर एक वस्त्र धारण करने की अनुमति होती है।

♦ये साधु आभूषण के रूप में केवल रुद्राक्ष या फूल मालाएं ही धारण कर सकते हैं।

♦ये साधु अपने माथे पर तिलक लगा सकते हैं।  इनका मानना है कि तिलक शक्ति की पहचान है।

♦इन साधुओं को पूरे दिन में केवल एक बार ही भोजन करना होता है।

♦एक साधु को  एक दिन में केवल 7 घरों से भिक्षा मांगने की अनुमति होती है यदि 7 घरों में से कुछ ना मिले तो इन्हें भूखा ही सोना पड़ता है।

♦इन्हें किसी प्रकार के पलंग या बेड पर सोने की अनुमति नहीं होती ये केवल जमीन पर ही सो सकते हैं।

♦नागा बाबा को किसी को भी प्रणाम करने की  अनुमति नहीं होती।

नागा साधु


♦ये आम लोगों के साथ नहीं रह सकते इन्हें लोगों की बस्तियों से दूर रहना होता है।

♦नागा साधु अपने  साथ हथियार धारण कर सकते हैं इनके मुख्य हथियार तलवार परसा या त्रिशूल होते हैं.ये साधु शस्त्र विद्या में पारंगत होते हैं।

♦नागा साधु प्राय पैदल ही यात्रा करते हैं।

नागा साधु बनने की प्रक्रिया

नागा साधु बनने की प्रक्रिया काफी कठिन है। ऐसा माना जाता है कि किसी व्यक्ति को नागा साधु बनने से पहले अपना ही पिंड दान करना  पड़ता है।  नागा बाबा बनने से पहले व्यक्ति को कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।  इन प्रक्रियाओं को संपन्न होने में कई साल तक लग जाते हैं।
जब कोई व्यक्ति अखाड़े में नागा साधु बनने आता है तो नागा साधु बनने से पहले अखाड़ा उस व्यक्ति की  पूरी तरह से तहकीकात करता है।  उस व्यक्ति की पृष्ठभूमि और परिवार को भी  देखा जाता है।

अखाड़े में प्रवेश

व्यक्ति की तहकीकात करने के बाद यदि अखाड़े को लगता है कि यह व्यक्ति साधु बनने के लायक है तभी उसे अखाड़े में आने की अनुमति मिलती है। अखाड़े में प्रवेश के बाद व्यक्ति के ब्रह्मचर्य की परीक्षा ली जाती है। जिसमें व्यक्ति को कई परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है. सबसे पहले व्यक्ति  की कामेंद्रिया नष्ट कर दी जाती है। इस प्रक्रिया में  इन्हें 24 घंटे तक अखाड़े के ध्वज के नीचे बिना खाए पिए खड़ा रहना पड़ता है. इसके बाद अखाड़े के साधु वैदिक मंत्र पढ़कर और झटका दे देकर लिंग को निष्क्रिय कर देते हैं।
इसके बाद अन्य परीक्षाएं शुरू होती है।
इस पूरे प्रकरण में 6 महीने से लेकर 12 साल तक लग सकते हैं।  सारी परीक्षाएं संपन्न होने के बाद व्यक्ति को गुरु मंत्र दिया जाता है और वह नागा साधु बन जाता है।

कुछ अन्य बातें

1.नागा साधुओं को अलग-अलग नाम से जाना जाता है. फरियाद के महाकुंभ में दीक्षा लेने वालों को नागा, उज्जैन में दीक्षा लेने वालों को खूनी नागा और हरिद्वार में दीक्षा लेने वाले को बर्फानी नागा कहा जाता है। नासिक में दीक्षा लेने वाले साधुओं को खीचड़िया के नाम से जाना जाता है।

2.नागा साधुओं को इनकी वरीयता के आधार पर अलग-अलग पद दिए जाते हैं जैसे कोतवाल ,बड़ा कोतवाल,पुजारी, महंत,भंडारी आदि।

3.नागा साधु हिमालय में शून्य से कम तापमान पर भी  बिना वस्त्र के जीवित रह सकते हैं।

नागा साधु
4.दिगंबर नागा साधु एक लंगोटी धारण कर सकते हैं जबकि श्रीदिगंबर नागा साधु कोई वस्त्र धारण नहीं कर सकते।

5.नागा साधुओं के चार आध्यात्मिक पद है जिनमें से परमहंस को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

6.प्राचीन काल में कुछ राजाओं के दरबार में भी नागा साधु हुआ करते थे जो उनकी रक्षा किया करते थे। इन नागा साधुओं को महाराजा कहा जाता था।
शेव नागा बाबा जटा रखते हैं जबकि वैष्णव नागा बाबा बाल नहीं रखते।

7.तरह-तरह की चिलम रखना और पीना भी नागा साधुओं में  प्रचलित है।

8.कुछ नागा एक टांग पर खड़े होकर करते हैं और कुछ पेड़ के नीचे बैठकर धूनी रमाते हैं।

9.कई नागा बाबा जानवरों को अपना शिष्य बनाते हैं जबकि कुछ नागा साधु  एक भी शिष्य नहीं रखते।

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